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शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
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नारद उवाच
भूतानामपरः कश्चिद्धिंसाय़ां सततोत्थितः |  १२   क
वञ्चनाय़ां च लोकस्य स सुखेष्वेव जीर्यते ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति