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शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
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नारद उवाच
देवानिष्ट्वा तपस्तप्त्वा कृपणैः पुत्रगृद्धिभिः |  १८   क
दश मासान्परिधृता जाय़न्ते कुलपांसनाः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति