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शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
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नारद उवाच
अन्नपानानि जीर्यन्ते यत्र भक्षाश्च भक्षिताः |  २४   क
तस्मिन्नेवोदरे गर्भः किं नान्नमिव जीर्यते ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति