शान्ति पर्व  अध्याय ३१८

नारद उवाच

घोरानपि दुराधर्षान्नृपतीनुग्रतेजसः |  ३४   क
आक्रम्य रोग आदत्ते पशून्पशुपचो यथा ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति