आदि पर्व  अध्याय ११४

वैशम्पाय़न उवाच

मरीचिः शिचुका चैव विद्युत्पर्णा तिलोत्तमा |  ५१   क
अग्निका लक्षणा क्षेमा देवी रम्भा मनोरमा ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति