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शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
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भीष्म उवाच
तत्र यास्यामि यत्रात्मा शमं मेऽधिगमिष्यति |  ५१   क
अक्षय़श्चाव्ययश्चैव यत्र स्थास्यामि शाश्वतः ||  ५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति