शान्ति पर्व  अध्याय ३१८

भीष्म उवाच

सोऽभिवाद्य महात्मानमृषिं द्वैपाय़नं मुनिम् |  ६१   क
शुकः प्रदक्षिणीकृत्य कृष्णमापृष्टवान्मुनिः ||  ६१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति