शान्ति पर्व  अध्याय ५९

भीष्म उवाच

सुसूक्ष्मा मे समुत्पन्ना वुद्धिर्धर्मार्थदर्शिनी |  १०७   क
अनय़ा किं मय़ा कार्यं तन्मे तत्त्वेन शंसत ||  १०७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति