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शान्ति पर्व
अध्याय ३१९
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भीष्म उवाच
ततः समतिचक्राम मलय़ं नाम पर्वतम् |  २०   क
उर्वशी पूर्वचित्तिश्च यं नित्यमुपसेवते |  २०   ख
ते स्म व्रह्मर्षिपुत्रस्य विस्मय़ं यय़तुः परम् ||  २०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति