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शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
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भीष्म उवाच
सम्पतन्देहजालानि कदाचिदिह मानुषे |  २१   क
व्राह्मण्यं लभते जन्तुस्तत्पुत्र परिपालय़ ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति