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शान्ति पर्व
अध्याय ७४
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कश्यप उवाच
आत्मा रुद्रो हृदय़े मानवानां; स्वं स्वं देहं परदेहं च हन्ति |  १९   क
वातोत्पातैः सदृशं रुद्रमाहु; र्दावैर्जीमूतैः सदृशं रूपमस्य ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति