आदि पर्व  अध्याय ३२

व्रह्मो उवाच

प्रीतोऽस्म्यनेन ते शेष दमेन प्रशमेन च |  १८   क
त्वय़ा त्विदं वचः कार्यं मन्निय़ोगात्प्रजाहितम् ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति