आदि पर्व  अध्याय ३२

व्रह्मो उवाच

शेषोऽसि नागोत्तम धर्मदेवो; महीमिमां धारय़से यदेकः |  २३   क
अनन्तभोगः परिगृह्य सर्वां; यथाहमेवं वलभिद्यथा वा ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति