शान्ति पर्व  अध्याय ३२

व्यास उवाच

अथापि लोके कर्माणि समावर्तन्त भारत |  २०   क
शुभाशुभफलं चेमे प्राप्नुवन्तीति मे मतिः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति