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शान्ति पर्व
अध्याय ३२
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व्यास उवाच
तद्राजञ्जीवमानस्त्वं प्राय़श्चित्तं चरिष्यसि |  २४   क
प्राय़श्चित्तमकृत्वा तु प्रेत्य तप्तासि भारत ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति