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शान्ति पर्व
अध्याय ३२
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वैशम्पाय़न उवाच
अनुतिष्ठस्व वै राजन्पितृपैतामहं पदम् |  ३   क
व्राह्मणेषु च यो धर्मः स नित्यो वेदनिश्चितः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति