अनुशासन पर्व  अध्याय ३२

युधिष्ठिर उवाच

के पूज्याः के नमस्कार्या मानवैर्भरतर्षभ |  १   क
विस्तरेण तदाचक्ष्व न हि तृप्यामि कथ्यताम् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति