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अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
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भीष्म उवाच
जाय़तां व्रह्मवर्चस्वी राष्ट्रे वै व्राह्मणः शुचिः |  ३   क
महारथश्च राजन्य एष्टव्यः शत्रुतापनः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति