वन पर्व  अध्याय ९७

लोमश उवाच

स तथेति प्रतिज्ञाय़ तय़ा समभवन्मुनिः |  २१   क
समय़े समशीलिन्या श्रद्धावाञ्श्रद्दधानय़ा ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति