आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३२

वैशम्पाय़न उवाच

यस्त्वेष पार्श्वेऽस्य महाधनुष्मा; ञ्श्यामो युवा वारणय़ूथपाभः |  ७   क
सिंहोन्नतांसो गजखेलगामी; पद्माय़ताक्षोऽर्जुन एष वीरः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति