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विराट पर्व
अध्याय ३२
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वैशम्पाय़न उवाच
शतानि त्रीणि शूराणां सहदेवः प्रतापवान् |  २५   क
युधिष्ठिरसमादिष्टो निजघ्ने पुरुषर्षभः |  २५   ख
भित्त्वा तां महतीं सेनां त्रिगर्तानां नरर्षभ ||  २५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति