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विराट पर्व
अध्याय ३२
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वैशम्पाय़न उवाच
स्ववाहुवलसम्पन्ना ह्रीनिषेधा यतव्रताः |  ३५   क
सङ्ग्रामशिरसो मध्ये तां रात्रिं सुखिनोऽवसन् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति