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विराट पर्व
अध्याय ३२
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वैशम्पाय़न उवाच
वलं तु मत्स्यस्य वलेन राजा; सर्वं त्रिगर्ताधिपतिः सुशर्मा |  ७   क
प्रमथ्य जित्वा च प्रसह्य मत्स्यं; विराटमोजस्विनमभ्यधावत् ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति