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उद्योग पर्व
अध्याय ३२
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सञ्जय़ उवाच
तवापीमे मन्त्रविदः समेत्य; समासते कर्मसु नित्ययुक्ताः |  २०   क
तेषामय़ं वलवान्निश्चय़श्च; कुरुक्षय़ार्थे निरय़ो व्यपादि ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति