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उद्योग पर्व
अध्याय ३२
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सञ्जय़ उवाच
किमन्यत्र विषय़ादीश्वराणां; यत्र पार्थः परलोकं ददर्श |  २२   क
अत्यक्रामत्स तथा संमतः स्या; न्न संशय़ो नास्ति मनुष्यकारः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति