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उद्योग पर्व
अध्याय ३२
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द्वाःस्थ उवाच
सञ्जय़ोऽय़ं भूमिपते नमस्ते; दिदृक्षय़ा द्वारमुपागतस्ते |  ४   क
प्राप्तो दूतः पाण्डवानां सकाशा; त्प्रशाधि राजन्किमय़ं करोतु ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति