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द्रोण पर्व
अध्याय ३२
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सञ्जय़ उवाच
स कृत्वा दुष्करं कर्म हत्वा वीरान्सहस्रशः |  १९   क
षट्सु वीरेषु संसक्तो दौःशासनिवशं गतः ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति