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उद्योग पर्व
अध्याय ३५
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विदुर उवाच
जरा रूपं हरति हि धैर्यमाशा; मृत्युः प्राणान्धर्मचर्यामसूय़ा |  ४३   क
क्रोधः श्रिय़ं शीलमनार्यसेवा; ह्रिय़ं कामः सर्वमेवाभिमानः ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति