उद्योग पर्व  अध्याय ४३

सनत्सुजात उवाच

तूष्णीम्भूत उपासीत न चेष्टेन्मनसा अपि |  ३४   क
अभ्यावर्तेत व्रह्मास्य अन्तरात्मनि वै श्रितम् ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति