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कर्ण पर्व
अध्याय ३२
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सञ्जय़ उवाच
हे सुषेण हतोऽसीति व्रुवन्नादत्त साय़कम् |  ५३   क
तमस्य कर्णश्चिच्छेद त्रिभिश्चैनमताडय़त् ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति