शान्ति पर्व  अध्याय ३३५

व्यास उवाच

आत्मप्रमाणरचिते अपामुपरि कल्पिते |  ५८   क
शय़ने नागभोगाढ्ये ज्वालामालासमावृते ||  ५८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति