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शल्य पर्व
अध्याय ३२
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सञ्जय़ उवाच
पाञ्चालाः पाण्डवेय़ाश्च धर्मराजपुरोगमाः |  २७   क
तद्वचो भीमसेनस्य सर्व एवाभ्यपूजय़न् ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति