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शल्य पर्व
अध्याय ३२
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सञ्जय़ उवाच
द्रौपदी च परिक्लिष्टा सभामध्ये रजस्वला |  ३८   क
द्यूते यद्विजितो राजा शकुनेर्वुद्धिनिश्चय़ात् ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति