menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ३२
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अद्य तेऽहं रणे दर्पं सर्वं नाशय़िता नृप |  ४५   क
राज्याशां विपुलां राजन्पाण्डवेषु च दुष्कृतम् ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति