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शान्ति पर्व
अध्याय ३२०
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भीष्म उवाच
छाय़ां स्वपुत्रसदृशीं सर्वतोऽनपगां सदा |  ३७   क
द्रक्ष्यसे त्वं च लोकेऽस्मिन्मत्प्रसादान्महामुने ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति