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शान्ति पर्व
अध्याय ३२१
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भीष्म उवाच
धर्मस्य कुलसन्तानो महानेभिर्विवर्धितः |  १७   क
अहो ह्यनुगृहीतोऽद्य धर्म एभिः सुरैरिह |  १७   ख
नरनाराय़णाभ्यां च कृष्णेन हरिणा तथा ||  १७   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति