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शान्ति पर्व
अध्याय ३२१
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श्रीभगवानु उवाच
यत्तत्सूक्ष्ममविज्ञेय़मव्यक्तमचलं ध्रुवम् |  २८   क
इन्द्रिय़ैरिन्द्रिय़ार्थैश्च सर्वभूतैश्च वर्जितम् ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति