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शान्ति पर्व
अध्याय ३२१
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श्रीभगवानु उवाच
स ह्यन्तरात्मा भूतानां क्षेत्रज्ञश्चेति कथ्यते |  २९   क
त्रिगुणव्यतिरिक्तोऽसौ पुरुषश्चेति कल्पितः |  २९   ख
तस्मादव्यक्तमुत्पन्नं त्रिगुणं द्विजसत्तम ||  २९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति