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शान्ति पर्व
अध्याय १९२
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व्राह्मण उवाच
फलप्राप्तिं न जानामि दत्तं यज्जपितं मय़ा |  ५१   क
अय़ं धर्मश्च कालश्च यमो मृत्युश्च साक्षिणः ||  ५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति