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शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
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भीष्म उवाच
तत्रावतस्थे च मुनिर्मुहूर्त; मेकान्तमासाद्य गिरेः स शृङ्गे |  ७   क
आलोकय़न्नुत्तरपश्चिमेन; ददर्श चात्यद्भुतरूपय़ुक्तम् ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति