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शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
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भीष्म उवाच
उद्यता यज्ञभागा हि साक्षात्प्राप्ताः सुरैरिह |  १५   क
किमर्थमिह न प्राप्तो दर्शनं स हरिर्विभुः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति