अनुशासन पर्व  अध्याय १०७

भीष्म उवाच

आगमानां हि सर्वेषामाचारः श्रेष्ठ उच्यते |  १४७   क
आचारप्रभवो धर्मो धर्मादाय़ुर्विवर्धते ||  १४७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति