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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १२
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धृतराष्ट्र उवाच
एवं कुर्वञ्शुभा वाचो लोकेऽस्मिञ्शृणुते नृपः |  १९   क
प्रेत्य स्वर्गं तथाप्नोति प्रजा धर्मेण पालय़न् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति