शान्ति पर्व  अध्याय ३२३

भीष्म उवाच

धनुषाक्षोऽथ रैभ्यश्च अर्वावसुपरावसू |  ७   क
ऋषिर्मेधातिथिश्चैव ताण्ड्यश्चैव महानृषिः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति