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शान्ति पर्व
अध्याय ३२४
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भीष्म उवाच
सुरपक्षो गृहीतस्ते यस्मात्तस्माद्दिवः पत |  १५   क
अद्य प्रभृति ते राजन्नाकाशे विहता गतिः |  १५   ख
अस्मच्छापाभिघातेन महीं भित्त्वा प्रवेक्ष्यसि ||  १५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति