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शान्ति पर्व
अध्याय २९
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वैशम्पाय़न उवाच
यः सहस्रं सहस्राणां राज्ञामय़ुत याजिनाम् |  ९४   क
ईजानो वितते यज्ञे व्राह्मणेभ्यः समाहितः ||  ९४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति