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शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
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युधिष्ठिर उवाच
एतदाश्चर्यभूतं हि माहात्म्यं तस्य धीमतः |  १०२   क
किं व्रह्मा न विजानीते यतः शुश्राव नारदात् ||  १०२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति