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शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
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भीष्म उवाच
खे वाय़ुः प्रलय़ं याति मनस्याकाशमेव च |  २९   क
मनो हि परमं भूतं तदव्यक्ते प्रलीय़ते ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति