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द्रोण पर्व
अध्याय १३२
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सञ्जय़ उवाच
तौ तदा सृञ्जय़ाश्चैव पाञ्चालाश्च महौजसः |  ४१   क
अन्वगच्छन्महाराज मत्स्याश्च सह सात्वतैः ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति