आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ४३

व्रह्मो उवाच

ज्योतिषां लक्षणं रूपमापश्च रसलक्षणाः |  २१   क
धरणी सर्वभूतानां पृथिवी गन्धलक्षणा ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति